
वंदेभारतलाइवटीव न्युज,शनिवार 28फरवरी 2026
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=====-: प्राप्त हुई जानकादी के अनुसार केन्द्र सरकार ने 01 अप्रैल 2026 से देश भर के पेट्रोल पंपों के लिए E20 पेट्रोल की बिक्री को अनिवार्य कर दिया है। प्राप्त जानकारी अनुसार पेट्रोलियम मंत्रालय भारत सरकार ने इस विषय में नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार केन्द्र शासित प्रदेशों में और राज्यों में तेल कंपनियों को 20% एथेनॉल युक्त पेट्रोल ही सप्लाई करना होगा। देश के कई भागों में ई20 20%एथेनॉल युक्त पेट्रोल की शुरुआत वर्ष 2023 से हो भी चुकी है, और यह ऑप्शनल भी था। भारत सरकार ने हाल ही में एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य भी 2030 से घटाकर 2025-26 कर दिया था, जो कि अब लागू भी किया जा रहा है। पेट्रोल पंप संचालक अब 95 रिसर्च ऑक्टेन नंबर का ही ई20 पेट्रोल की बिक्री कर सकेंगे। जानकारी के अनुसार इस फ्यूल के लिए रिसर्च ऑक्टेन नंबर कम से कम 95 तय किया गया है, जिससे वाहन के इंजन को सुरक्षित भी रखा जा सके। यह फ्यूल इंजन के अंदर समय से पूर्व आग लगने को रोकने की क्षमता रखता है। ऑक्टेन नंबर यह बताता है कि पैट्रोल कितना सुरक्षित और सहनशील हैह जिस पेट्रोल का आरओएन नंबर जितना अधिक होगा वह उतनी ही आसानी के साथ वाहन के इंजन के दबाव को भी झेलेगा, और बिना किसी प्रकार के आवाज या झटके के सही समय पर जलेगा। इससे वाहन के इंजन की समय सीमा भी बढ़ती है और वाहन सुचारू रूप से चलता है। अभी वर्तमान समय मे बिकने वाला साधारण पेट्रोल का 91 RON होता है, और यह केवल प्रीमियम पेट्रोल जैसे कि XP95,ही 95 RON का मिलता है। जानकारी अनुसार वर्ष 2023से लेकर 2025 के बीच तक बने हुए अधिकतर वाहन ई20 ईधन के हिसाब से ही डिजाइन भी किए गए हैं, इसलिए उनमें किसी तरह की कोई समस्या नहीं आयेगी। पुराने वाहनों में हलाॅकि कोई परेशानी हो सकती है। एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है जो कि स्टार्च और शूगर के लिए फर्मेंटेशन से बनाया जाता है, । इसे पेट्रोल मे मिलाकर वाहनों में इको फ्रेंडली फ्यूल की तरह उपयोग किया जाता है। एथेनॉल का मुख्य रूप से उत्पादन गन्ने के रस से किया जाता है। परंतु स्टार्च कॉन्टेनिंग मटेरियल जैसे कि सड़े हुए आलू, कसावा, सड़ी हुई सब्जियों, मक्का आदि से भी एथेनॉल तैयार किया जा सकता है। पेट्रोल डीजल से चलने वाले वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए भी और फ्यूल के बढ़ते हुए दामों को कम करने के उद्देश्य से भी विश्व भर की सरकारें एथेनॉल युक्त पेट्रोल पर काम कर रही हैं। हमारे देश भारत में भी एथेनॉल को पेट्रोल डीजल के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इससे वाहनों की माइलेज क्षमता भी बढ़ सकती है। इसके अतिरिक्त भारत देश में अप्रैल में सिर्फ फ्लेक्स फ्यूल कंप्लाइंट गाड़ियां ही बेची भी जा रही हैं। इसके साथ ही पुरानी गाड़ियां एथेनॉल कंप्लाइंट गाड़ियों में बदली भी जा सकेंगी। वाहनों उपयोग मे लाए जाने वाले पेट्रोल मे एथेनॉल मिलाने से पेट्रोल के उपयोग से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने में एक प्रकार से मदद भी मिल सकती है। इसके उपयोग से वाहन 35% तक कम कार्बन मोनोऑकसाइड का उत्सर्जन करती हैं। सल्फर डाइऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन का भी उत्सर्जन एथेनॉल कम करता है, और एथेनॉल में मौजूद 35% ऑक्सीजन के कारण ये फ्यूल नाइट्रोजन ऑक्साइड के भी उत्सर्जन कम करते हैं। एथेनॉल मिलावट वाले पेट्रोल से चलने वाली वाहनें पेट्रोल से के मूकाबले में कम गर्म भी होती हैं। एथेनॉल मे अल्कोहल शीघ्रता से उड़ भी जाता है, जिससे वाहन के इंजन जल्दी गर्म भी नहीं होते हैं। इसके अतिरिक्त यह कच्चे तेल के हिसाब से काफी सस्ता भी पड़ता है। एथेनॉल के उपयोग बढ़ने से किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी भी हो सकती है। क्योंकि एथेनॉल कृषि आधारित उत्पाद जैसे कि – गन्ने, मक्का, आदि दूसरी फसलों के माध्यम से तैयार किया जाता है। जिससे किसानों की आमदनी मे बढ़ोतरी हो सकती है।



